3 महीने की जन्म नियंत्रण की गोली कितनी प्रभावी है?HealthPlanet

Posted on Wed 30th Nov 2022 : 09:08

कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन को चुनतीं महिलाएं:3 महीने पर एक डोज, गर्भनिरोधक गोलियों से ज्यादा पसंद, रोज की झंझट से छुटकारा, अनचाही प्रेग्नेंसी से दूरी

एक गर्भनिरोधक गोली रोज खानी पड़ती है जो टेंशन की वजह बनती है। अगर भूल जाओ तो प्रेग्नेंट होने का डर सताने लगता है। इससे बचने का आसान तरीका है कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन। जो रोज गोली खाने के झंझट से मुक्ति देता है। इससे जहां अपने शरीर को लेकर महिला आजाद रहती है, वहीं उसे अपने पार्टनर के आगे शरीर की सुरक्षा को लेकर मिन्नतें नहीं करनी पड़तीं।

हर 3 महीने में लगता है इंजेक्शन
कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन में प्रोजेस्टोन हार्मोन होते हैं जो प्रेग्नेंसी को रोकते हैं। नोएडा सेक्टर-110 के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में गायनाकोलॉजिस्ट डॉक्टर मीरा पाठक का कहना है कि यह इंजेक्शन हर 3 महीने पर लगता है। जिन महिलाओं को कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने में दिक्कत आती है या वह भूल जाती हैं, उनके लिए यह इंजेक्शन काफी फायदेमंद हैं। इस इंजेक्शन को DMPA कहते हैं।

स्पर्म गर्भाशय तक नहीं पहुंचता
हर महीने महिलाओं के शरीर में एग बनता है। कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन लेने से प्रोजेस्टोन हार्मोन रिलीज होता है जो खून में मिलता रहता है। इससे सर्वाइकल म्यूकस मोटा हो जाता है जो संबंध बनाने के दौरान स्पर्म को महिला के गर्भाशय में प्रवेश नहीं करने देता।

पीरियड्स के पहले या दूसरे दिन लगाया जाता है
डॉक्टर मीरा पाठक के अनुसार यह इंजेक्शन 99% असरदार है। इसे पीरियड्स के पहले या दूसरे दिन लगाया जाता है। साथ ही महिला को यह बताया जाता है कि अगले 7 दिन तक अगर संबंध बनाएं तो कॉन्डम या डायाफ्रम का इस्तेमाल करें क्योंकि इंजेक्शन 7 दिन बाद असर करना शुरू करता है।

इस इंजेक्शन की सबसे अच्छी बात यह है कि अगर किसी महिला ने इसे 1 अगस्त को लगवाया है और 1 अक्टूबर को किसी कारणवश नहीं लगवा पाई हैं तो 28 दिनों के अंदर कभी भी इंजेक्शन लगवा सकती हैं।

तीन महीने बाद अगर इंजेक्शन में 28 दिन का गैप आ जाए तो सबसे पहले महिला का प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाया जाता है। अगर टेस्ट नेगेटिव आए तभी इंजेक्शन लगता है। लेकिन इसके बाद फिर से अगले 7 दिन तक संबंध बनाने के दौरान कॉन्डम यूज करने की सलाह दी जाती है।

इस इंजेक्शन को लगवाने के बाद भी प्रेग्नेंसी का चांस तभी बनता है जब डोज लेने के बाद 7 दिन के बीच असुरक्षित संबंध बनाए जाएं या इंजेक्शन को सही ढंग से या सही मात्रा में ना लगवाया जाए। लेकिन अभी तक ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं।

डिलीवरी के 42 दिन के बाद लगाई जा सकती है डोज
कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन को डिलीवरी के 42 दिन के बाद लगवाया जा सकता है। इससे बच्चे को दूध पिलाने पर कोई असर नहीं पड़ता। जबकि अगर कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ली जाएं तो दूध कम बन सकता है। वहीं, मिसकैरेज या अबॉर्शन के केस में इसे तुरंत लगवाया जा सकता है ताकि अगली प्रेग्नेंसी से बचा जा सकता है।

इन महिलाओं को नहीं लेने चाहिए इंजेक्शन
अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर, लंबे समय से डायबिटीज, ब्लड क्लॉटिंग, ब्रेन स्ट्रोक, लिवर से जुड़ी बीमारी या हार्ट अटैक आया हो तो उन महिलाओं को ये इंजेक्शन नहीं लेने चाहिए।

मुफ्त में लगते हैं इंजेक्शन
1960 में डेपो प्रोवेरा नाम से कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन बनाया गया। अमेरिका में 29 अक्टूबर 1992 को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से इसे अनुमति मिली। भारत में इस इंजेक्शन को जून 1993 में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिली। यहां इसे राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत लॉन्च किया गया।

सरकारी अस्पतालों और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में अंतरा नाम का कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन फ्री में लगाया जाता है। वहीं मार्केट में डेपो प्रोवेरा इंजेक्शन बिकता है जो 406 रुपए का मिलता है।
नेशनल हेल्थ स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 23% महिलाएं इंजेक्शन लगवाती हैं।
नेशनल हेल्थ स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 23% महिलाएं इंजेक्शन लगवाती हैं।

शरीर में कोई बदलाव नहीं आता
इंजेक्शन लेने के बाद शरीर में कोई बदलाव नहीं आता। कभी-कभी किसी महिला का शरीर इसकी डोज से तुरंत एडजस्ट नहीं कर पाता। इस वजह से कभी भी ब्लड स्पॉटिंग हो जाती है। पीरियड्स भी कभी-कभी कुछ समय के लिए 15 दिन तक चलते हैं, लेकिन ऐसा कम महिलाओं में देखा गया है।

मॉडर्न तरीके अपना रहीं हैं भारतीय महिलाएं
फैमिली प्लानिंग 2020 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1.39 करोड़ लड़कियां और महिलाएं गर्भनिरोधक के नए-नए तरीके अपना रही हैं। इनमें कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन भी शामिल हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) 2019-21 के अनुसार भारत में गर्भनिरोधक को लेकर जागरूकता बढ़ी है। 67% महिलाएं कॉन्ट्रासेप्टिव इस्तेमाल करती हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राजस्थान में साल 2019-2020 में 99496 महिलाओं ने कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन की डोज लगवाई।

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